✍️ बैतूल इरशाद खान
कबीर साहेब जी के निर्वाण दिवस पर 35 जोड़ों का आदर्श दहेजमुक्त विवाह, 273 यूनिट रक्तदान
संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में महाविशाल समागम, लाखों श्रद्धालुओं ने किया पापनाशक भंडारा ग्रहण
बैतूल। जिले के ग्राम उड़दन स्थित सतलोक आश्रम में बुधवार को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी के निर्वाण दिवस के अवसर पर संत रामपाल जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित तीन दिवसीय महाविशाल समागम का दूसरा दिन श्रद्धा, सेवा और समाज सुधार के कार्यों के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने पापनाशक भंडारा ग्रहण किया।
आश्रम के सेवादारों ने बताया कि लगभग 508 वर्ष पूर्व कबीर साहेब जी ने समाज में फैले पाखंड को समाप्त करने के लिए मगहर से सशरीर सतलोक गमन किया था। उसी की स्मृति में यह विशाल आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सभी समाज के लोगों को आमंत्रित किया गया है। भंडारे में शुद्ध देशी घी से बने लड्डू, सब्जी, पूड़ी, दाल, चावल व हलवा परोसा जा रहा है। साथ ही संत गरीबदास जी महाराज द्वारा रचित अमर ग्रंथ साहिब की अमरवाणी का अखंड पाठ भी चल रहा है।
समागम के दूसरे दिन संत रामपाल जी महाराज के समाज सुधार अभियान के अंतर्गत मात्र 17 मिनट में गुरुवाणी द्वारा 35 जोड़ों का आदर्श दहेजमुक्त विवाह संपन्न कराया गया। सभी वर-वधू सादे वस्त्रों में बिना किसी आडंबर के विवाह बंधन में बंधे। इसके साथ ही जिला चिकित्सालय बैतूल के स्टाफ की उपस्थिति में 273 यूनिट रक्तदान किया गया तथा 3585 लोगों ने देहदान का संकल्प पत्र भरा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 300×900, 90×900 एवं 60×900 फीट के विशाल पंडाल, भंडारे हेतु 350×200 फीट का पंडाल, जूता घर, पार्किंग, मोबाइल चार्जिंग, शौचालय, आध्यात्मिक प्रदर्शनी, निःशुल्क नामदीक्षा, नेत्र एवं दंत चिकित्सा शिविर सहित अन्य रोगों के उपचार की व्यवस्था की गई है। फोरलेन से आश्रम तक लगी प्रदर्शनी और रात्रिकालीन रोशनी से सजा आश्रम दीपावली जैसा दृश्य प्रस्तुत कर रहा है।
खबर लिखे जाने तक 2750 श्रद्धालु संत रामपाल जी महाराज से निःशुल्क नामदीक्षा ग्रहण कर चुके थे। कार्यक्रम में उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इतनी विशाल संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद कहीं अव्यवस्था या भगदड़ की स्थिति नहीं बनी, सभी व्यवस्थाएं सेवादारों द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संभाली गईं।
उल्लेखनीय है कि 29 जनवरी को इस महाविशाल समागम का अंतिम दिन है, जिसके लिए सर्व समाज के लोगों को आत्मीय आमंत्रण दिया गया है।


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