बैतूल इरशाद खान
आमला में कथित सट्टा कारोबार का आरोप, शादाब का नाम चर्चा में—पुलिस कार्रवाई पर सवाल
छोटे से शहर में कथित तौर पर बड़े स्तर पर सट्टा कारोबार संचालित होने की चर्चा, जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल।
बैतूल आमला शहर में कथित सट्टा कारोबार को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों और चर्चाओं में ‘शादाब’ नाम के व्यक्ति पर सट्टे के कथित कारोबार से जुड़े होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की वास्तविकता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि आमला में सट्टे से जुड़े लोगों के बीच शादाब का नाम लंबे समय से चर्चा में है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि शहर में कथित तौर पर सट्टे का कारोबार बड़े स्तर पर संचालित किया जा रहा है। यदि इन दावों में सच्चाई है, तो यह न केवल गंभीर कानून-व्यवस्था का विषय है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
‘सरकार किसी की भी हो, राज हमारा रहेगा’ जैसी स्थिति तो नहीं?
सट्टे के कथित कारोबार को लेकर स्थानीय लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि यदि आमला में इस तरह की गतिविधियों की जानकारी लगातार सामने आ रही है, तो आखिर प्रभावी कार्रवाई कब होगी? क्या सट्टा कारोबारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई केवल छोटे स्तर तक सीमित है या बड़े नामों तक भी जांच पहुंचेगी?
एसपी के निर्देशों के बावजूद आमला में कथित कारोबार की चर्चा
पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन द्वारा जिले में जुआ-सट्टा जैसी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई के निर्देश दिए जाते रहे हैं। ऐसे में आमला में कथित तौर पर सट्टा कारोबार संचालित होने की चर्चाओं के बीच पुलिस की स्थानीय निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पुलिस जांच करे तो सामने आ सकती है पूरी हकीकत
‘शादाब’ नाम से जुड़े आरोपों की सच्चाई क्या है और आमला में वास्तव में सट्टे का कोई संगठित नेटवर्क संचालित हो रहा है या नहीं, इसका खुलासा निष्पक्ष पुलिस जांच से ही हो सकता है। जरूरत है कि पुलिस इन आरोपों और स्थानीय स्तर पर मिल रही सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए जांच करे।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो स्थिति भी स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति की छवि प्रभावित न हो।
अब बड़ा सवाल यही है—आमला में कथित सट्टा कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों पर पुलिस कब कार्रवाई करेगी और ‘शादाब’ नाम से जुड़ी चर्चाओं की वास्तविकता जांच में कब सामने आएगी?


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