डॉ आनंद मालवीय जैसे समर्पित चिकित्सक का इस्तीफा भाजपा सरकार के लिए चेतावनी: डागा
बैतूल इरशाद खान
15 साल की सेवा के बाद डॉक्टर ने इस्तीफा देकर छोड़ा अस्पताल, सवालों के घेरे में भाजपा सरकार
डॉक्टरों को भगाकर पीपीपी मॉडल थोप रही भाजपा सरकार : निलय डागा
बैतूल।
प्रदेश सरकार जहां स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि सरकारी अस्पताल डॉक्टरों के अभाव में हांफ रहे हैं। कांग्रेस जिला अध्यक्ष निलय विनोद डागा ने कहा कि डॉ आनंद मालवीय जैसे समर्पित और पुरस्कार प्राप्त चिकित्सक का इस्तीफा भाजपा सरकार के लिए चेतावनी है।
उन्होंने कहा कि बैतूल जिला अस्पताल की स्थिति प्रदेश और देश की स्वास्थ्य नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में 61 डॉक्टरों के पद स्वीकृत होने के बावजूद वर्तमान में केवल 27 डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं। प्रतिदिन 1 हजार से 1200 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, वहीं करीब 400 मरीज रोजाना भर्ती रहते हैं। इतनी भारी भीड़ के बीच सीमित डॉक्टरों पर इलाज का पूरा बोझ डाल दिया गया है।
निलय डागा ने कहा कि यह सिर्फ बैतूल जिला अस्पताल की कहानी नहीं है, पूरे मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार की स्वास्थ्य नीति की असल तस्वीर है। सरकार कागजों में योजनाएं बना रही है, करोड़ों के अस्पताल भवन खड़े कर रही है, लेकिन डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए उसके पास न नीति है और न इच्छाशक्ति। यही कारण है कि नए डॉक्टर सरकारी सेवा में आ नहीं रहे और अनुभवी डॉक्टर नौकरी छोड़कर निजी क्षेत्र की ओर जा रहे हैं।
- 2011 में संभाला था जिला अस्पताल में कार्यभार
उल्लेखनीय है कि डॉ आनंद मालवीय ने वर्ष 2011 में बैतूल जिला अस्पताल में कार्यभार संभाला था। इससे पहले उन्होंने भोपाल के प्यूपिल्स हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में दो वर्ष तक सेवाएं दी थीं। वे 1998 बैच के इंदौर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पास थे और उज्जैन मेडिकल कॉलेज से एक वर्ष तथा हैदराबाद के फैजान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज से तीन वर्ष तक डीएनबी मेडिसिन की ट्रेनिंग ली थी। उनके कार्यकाल में जिले ने टीबी नियंत्रण कार्यक्रम में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं, जिसके लिए उन्हें वर्ष 2019 के लिए 2020 में ब्रॉन्ज अवॉर्ड और 2023 में सिल्वर नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। एचआईवी कार्यक्रम में भी उन्होंने मॉडल अधिकारी के रूप में कार्य किया।
- वर्षों से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा जिला अस्पताल
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों का नतीजा यह है कि जिला अस्पताल वर्षों से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। बांड पर आने वाले डॉक्टर कुछ समय बाद राजधानी या बड़े जिलों में तबादला करा लेते हैं। पिछले कुछ वर्षों में डॉ अशोक बारंगा, डॉ डब्ल्यूए नागले, डॉ ओपी यादव जैसे वरिष्ठ डॉक्टर सेवानिवृत्त हुए, वहीं डॉ प्रदीप कुमरा, डॉ रश्मि कुमरा, डॉ राहुल शर्मा, डॉ प्रतिभा रघुवंशी और डॉ आयुष श्रीवास्तव जैसे विशेषज्ञों ने शासकीय सेवा छोड़ दी। इन सबके बाद भी सरकार ने कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला।
- सरकारी अस्पतालों को जानबूझकर कमजोर कर रही भाजपा सरकार
निलय विनोद डागा ने प्रस्तावित पीपीपी मेडिकल कॉलेज का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार सरकारी अस्पतालों को जानबूझकर कमजोर कर रही है, ताकि निजीकरण को बढ़ावा दिया जा सके। पीपीपी मॉडल के नाम पर मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है। कांग्रेस इस प्रस्ताव का चरणबद्ध तरीके से विरोध कर रही है और आने वाले समय में इसे लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता का इलाज व्यापार नहीं, बल्कि सरकार की जिम्मेदारी है और कांग्रेस इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन तक ले जाएगी।

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